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समत्वं योग उच्यते : गीता में तनाव प्रबंधन के सूत्र Samatwam Yog Uchchyate : Geeta Mein Tanav Prabandhan Ke Sutra

350.00 Original price was: ₹350.00.280.00Current price is: ₹280.00.

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Edition :

डॉ. अनुराग दीक्षित, एम.एस-सी., पी-एच. डी. (गणित)

978-93-5857-417-3

156

A5

Paperback

Nitya Publications

First

-20%

समत्वं योग उच्यते : गीता में तनाव प्रबंधन के सूत्र Samatwam Yog Uchchyate : Geeta Mein Tanav Prabandhan Ke Sutra

350.00 Original price was: ₹350.00.280.00Current price is: ₹280.00.

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Description

आमुख

 

एक युगांतकारी संवाद की शुरुआत

मानव जीवन की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि हमारे पास जीवन को सुखी बनाने के लिए सब कुछ है—सुविधाएँ, संसाधन, ज्ञान—फिर भी हम सुख से वंचित हैं। आज का मनुष्य भौतिकता के शिखर पर खड़ा होकर भी आंतरिक शांति के लिए तरस रहा है। यह पुस्तक उसी गहन समस्या और उसके एक अद्भुत समाधान के बीच सेतु बनाने का प्रयास है।

प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का अद्भुत मिलन

जब हम श्रीमद्भगवद्गीता को एक नए परिप्रेक्ष्य में देखते हैं, तो पाते हैं कि यह केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव मन का सूक्ष्म और वैज्ञानिक अध्ययन है। गीता का ज्ञान आज के न्यूरोसाइंस, मनोविज्ञान और मनोचिकित्सा के नवीनतम शोधों से अद्भुत रूप से मेल खाता है। यह पुस्तक इसी समानता को उजागर करती है—दिखाती है कि कैसे गीता का ‘समत्वम्’ आधुनिक ‘इमोशनल इंटेलिजेंस’ है, ‘निष्काम कर्म’ ‘फ्लो स्टेट’ है, और ‘स्थितप्रज्ञ’ ‘साइकोलॉजिकल रेजिलिएंस’ का आदर्श रूप है।

क्यों यह पुस्तक आपके लिए है?

यदि आप:

  • तनाव और चिंता से ग्रस्त हैं,
  • कार्य और जीवन के संतुलन को खोज रहे हैं,
  • अपनी भावनाओं पर नियंत्रण चाहते हैं,
  • जीवन के उद्देश्य और सार्थकता को समझना चाहते हैं,
  • आधुनिक विज्ञान और प्राचीन ज्ञान के समन्वय में विश्वास रखते हैं,

तो यह पुस्तक आपके लिए ही लिखी गई है।

क्या पाएंगे आप इस पुस्तक में?

इस पुस्तक में हम गीता के मूल सिद्धांतों को तनाव प्रबंधन के व्यावहारिक सूत्रों में ढालते हैं:

  • भाग 1 में तनाव के मूल कारणों और गीता के प्राथमिक निदान को समझेंगे,
  • भाग 2 में आत्म-ज्ञान और आंतरिक स्थिरता की नींव रखेंगे,
  • भाग 3 में मन के विभिन्न विकारों और उनके निवारण का विश्लेषण करेंगे,
  • भाग 4 में व्यावहारिक जीवन में इन सिद्धांतों को उतारने के तरीके सीखेंगे,
  • भाग 5 में एक पूर्ण कार्ययोजना प्रस्तुत करेंगे जो गीता के ज्ञान को दैनिक जीवन का अंग बना देगी।

एक व्यक्तिगत निमंत्रण

यह पुस्तक केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि जीने के लिए है। इसे पढ़ते समय आपसे अनुरोध है कि आप केवल पाठक न बनें, बल्कि एक साधक बनें। प्रत्येक अध्याय के साथ स्वयं को जाँचें, प्रयोग करें, और परिवर्तन को अनुभव करें।

हम एक ऐसी यात्रा पर निकल रहे हैं जहाँ प्राचीनता और आधुनिकता का भेद मिट जाता है, जहाँ अर्जुन का विषाद और आज के मनुष्य की चिंता एक ही समाधान पाते हैं। आइए, इस यात्रा में हम साथ चलें—अपने भीतर के कृष्ण को जगाएँ और अपने अर्जुन को मार्गदर्शन दें।

डॉ. अनुराग दीक्षित

अनुक्रमणिका

(Table of Contents)

प्रस्तावना: आधुनिक चिंता और एक प्राचीन अमृत – क्यों गीता आज भी प्रासंगिक है?

भाग 1: समस्या की पहचान और मूल आधार                                                  

  • अध्याय 1: तनाव का आधुनिक महामारी और गीता का प्राथमिक निदान
  • अध्याय 2: समत्वम्: तनाव मुक्ति का केंद्रीय स्तंभ

 

भाग 2: आत्म-ज्ञान और आंतरिक आधार                                           

  • अध्याय 3: ‘मैं’ कौन हूँ? आत्म-ज्ञान से आत्म-विश्वास
  • अध्याय 4: कर्मयोग: फल की चिंता छोड़, कर्म पर ध्यान केंद्रित करो

 

भाग 3: विकारों का उन्मूलन और मन का शोधन                                  

  • अध्याय 5: इच्छाओं का समुद्र: वासना से मुक्ति का मार्ग
  • अध्याय 6: स्थितप्रज्ञ: आधुनिक दुनिया में अडिग मन का व्यक्तित्व
  • अध्याय 7: चित्तशुद्धि: मन की निर्मलता के लिए ध्यान और माइंडफुलनेस
  • अध्याय 8: संकल्प-विकल्प: नकारात्मक विचारों से मुक्ति का विज्ञान

 

भाग 4: व्यावहारिक जीवन में एकीकरण                                          

  • अध्याय 9: स्वधर्म: अपनी वास्तविक प्रकृति के अनुसार जीवन
  • अध्याय 10: समभाव: सफलता और विफलता में समान रहना
  • अध्याय 11: विश्वास और समर्पण: नियंत्रण के भ्रम से मुक्ति

 

भाग 5: कार्यान्वयन एवं निष्कर्ष                                                     

  • अध्याय 12: गीता-आधारित तनाव प्रबंधन कार्ययोजना: दैनिक जीवन में एकीकरण : एक तनावमुक्त, आनंदमय और सार्थक जीवन की ओर

 

परिशिष्ट (Appendix)                                                                 

  • गीता के प्रमुख श्लोक: संस्कृत, हिंदी अर्थ एवं तनाव प्रबंधन में उनकी प्रासंगिकता
  • शब्दावली: गीता एवं मनोविज्ञान के प्रमुख शब्दों की व्याख्या
  • संदर्भ ग्रंथ सूची