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दुुखों से मुक्ति परमात्मा के हाथ

400.00 320.00

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Book Format :

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Edition :

योगेन्द्र प्रधान

978-93-5857-545-3

212

A5

Paperback

Nitya Publications, Bhopal

First

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दुुखों से मुक्ति परमात्मा के हाथ

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Description

जीवन का प्रारंभ खुषी से होता है और अंत दुखों से। घर के लोग पैदा होने पर खुषियां मनाते हैं। पता नहीं, क्या क्या विचार मन में आते हैं। बड़ी उमंग के साथ जीवन का प्रारंभ होता है। पर धीरे धीरे सारी खुषियां गायब होती जाती हैं। जीवन में समस्याओं का दौर षुरू हो जाता है। पढार्इ्र लिखाई से लेकर नौकरी, षादी, ब्याह, बच्चों का लालन-पालन, रोग, बीमारी, गरीबी, धन की कमी आदि का सिलसिला भी षुरू हो जाता है।

बार बार जन्म लेना भी दुख का कारण है। सभी लोग इतने भाग्यषाली नहीं होते हैं, कि इन उपरोक्त समस्याओं से निपट सकें। फलस्वरूप जीवन दुखमय हो जाता है। बुढ़ापे मंे और भी समस्याऐं खड़ी हो जाती हैं। जीवन में दुख आने पर, दुख के कई कारण बताये जाते हैं। दुखों से निबटने के बहुत से उपाय, उपदेष भी दिये जाते हैं। पर फिर भी जीवन अषांत ही बना रहता हैं।

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