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भारतीय सांस्कृतिक प्रतिमानों का व्यावसायिक महत्त्व

250.00 200.00

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डॉ. सुलक्ष्मी तोषनीवाल

978-93-91257-34-7

132

A5

Paperback

Nitya Publications, Bhopal

First

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भारतीय सांस्कृतिक प्रतिमानों का व्यावसायिक महत्त्व

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Description

भारतीय संस्कृति विश्व की प्राचीनतम संस्कृतियांे में से एक है। भारतीय संस्कृति को देव तुल्य संस्कृति माना जाता है, यह छः ऋतुओं का देश है, जहाँ प्रकृति विभिन्न रूपों में इसका अभिनन्दन कर रही है। भारतीय संस्कृति कभी कठोर नहीं रही इसीलिए यह आधुनिक काल में भी गर्व के जिन्दा है। यह दूसरी संस्कृतियों की विशेषताओं के साथ समन्वय करती रही है, परन्तु अपनी मूलभूत विशेषताओं को भी संजोें कर रखा है। समय के साथ चलते रहना भारतीय संस्कृति की सबसे अनूठी बात है।

       किसी भी देश के विकास में उसकी संस्कृति का बहुत योगदान होता है। देश की संस्कृति उसके मूल्य, लक्ष्य, प्रथायें, उसकी आस्था के प्रतीक चिन्ह आदि सभी के साझा विश्वास का प्रतिनिधित्व करते है। भारतीय मूल्य-सूक्ष्म, सही और अनन्त है, यहाँ की जीवन-शैली प्रकृति के साथ चलती है उसका संरक्षण करती है, अनेकता में एकता, सभी के प्रति समभाव आदि ऐसी चीज है जो भारत जैसे सांस्कृतिक और विरासत में समृद्ध देश पर पूरी तरह लागू होती है। रिश्तों में गर्माहट और उत्सवों में जोश के कारण यह देश विश्व में हमेशा अलग ही नजर आया है।

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