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आरक्षण 2.0 Arakshan 2.0

300.00 Original price was: ₹300.00.240.00Current price is: ₹240.00.

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Edition :

डॉ. आदर्श कुमार Dr Adarsh Kumar

978-93-5857-432-6

109

A5

Paperback

Nitya Publications

First

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आरक्षण 2.0 Arakshan 2.0

300.00 Original price was: ₹300.00.240.00Current price is: ₹240.00.

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Description

प्रस्तावना

 

समता, स्वतंत्रता और न्याय केवल शब्द नहीं, बल्कि किसी राष्ट्र के प्राण होते हैं।

भारत के संविधान में निहित मूल भावनाएँ – समता का अधिकार (Article 14), अवसर की समानता (Article 16) और सामाजिक न्याय – आज भी हमारी राष्ट्रनीति का पथदर्शक सिद्धांत हैं। परंतु इन आदर्शों की व्यावहारिकता पर प्रश्नचिह्न तब खड़े होते हैं जब आरक्षण जैसी नीतियाँ समय, परिस्थिति और सामाजिक-आर्थिक संरचना के अनुरूप परिष्कृत नहीं की जातीं।

  • आरक्षण की मूल भावना और आज की चुनौतियाँ

आरक्षण एक कल्याणकारी औजार था, जिसका उद्देश्य था – उन वर्गों को सामाजिक मुख्यधारा में लाना जो सदियों तक उपेक्षित रहे। यह नीति उस समय उपयुक्त थी जब जाति ही निर्धनता और उत्पीड़न का पर्याय हुआ करती थी।

किन्तु आज, 21वीं सदी के भारत में परिस्थितियाँ बदल चुकी हैं –

  • अब निर्धनता जाति देखकर नहीं आती।
  • कई पिछड़े वर्ग अब सामाजिक और आर्थिक रूप से उन्नत हो चुके हैं।
  • वहीं सामान्य वर्ग के लाखों परिवार आर्थिक रूप से पिछड़े होने के बावजूद आरक्षण से वंचित हैं।

इन असंतुलनों ने समानता के सिद्धांत को गहराई से प्रभावित किया है।

  • आरक्षण 0” – केवल शीर्षक नहीं, एक वैचारिक पुनर्जागरण

इस पुस्तक का शीर्षक “आरक्षण 2.0” कोई आकस्मिक चयन नहीं है। यह शीर्षक दर्शाता है कि अब समय आ गया है कि हम आरक्षण नीति का “अपग्रेडेड संस्करण” तैयार करें – एक ऐसा संस्करण जो भारत की वर्तमान सामाजिक-आर्थिक संरचना के अनुरूप हो।

आरक्षण 2.0 का लक्ष्य है:

  • जाति आधारित स्थायी विशेषाधिकार को समाप्त करना,
  • गरीबों को बिना भेदभाव आरक्षण का लाभ देना,
  • योग्यता, गरीबी और अवसरों की वास्तविक असमानता के आधार पर नीति का पुनर्निर्माण करना।
  • यह पुस्तक क्या है और क्या नहीं है
  • यह पुस्तक किसी जाति या वर्ग के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह गरीबी, वंचनाओं और असमान अवसरों के खिलाफ एक तथ्यपूर्ण विमर्श है।
  • यह पुस्तक आरक्षण की आवश्यकता को नकारती नहीं है, बल्कि इसके दुरुपयोग, सीमाओं और समयानुकूल नवीकरण की मांग करती है।
  • यह पुस्तक केवल एक आंदोलन की घोषणा नहीं है, बल्कि एक नीति-संवाद, संवैधानिक पुनरावलोकन और सामाजिक न्याय के लिए ठोस प्रस्तावना है।
  • युवा भारत का आह्वान

आज का भारत युवा है – सोचने, प्रश्न पूछने और परिवर्तन लाने को तत्पर। यह पुस्तक इसी युवा भारत को समर्पित है – जो जातिगत मानसिकता से ऊपर उठकर “एक भारत, न्यायपूर्ण भारत” का स्वप्न देखता है।

“आरक्षण 2.0” एक विचार है, एक आवाज़ है, और एक दिशा है – जिसे संविधान की मर्यादा में रहते हुए, लोकतांत्रिक प्रक्रिया से, शांतिपूर्ण ढंग से एक न्यायपूर्ण व्यवस्था की स्थापना हेतु आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

  • लेखक का उद्देश्य

मेरी यह कृति एक लेखक की नहीं, बल्कि एक जागरूक नागरिक की अंतरात्मा की पुकार है।मेरा उद्देश्य किसी को नीचा दिखाना नहीं, बल्कि नीति को ऊँचा उठाना है। यह पुस्तक शोध, अनुभव, जनसंवाद, ऐतिहासिक दस्तावेज़ों और संवैधानिक अध्ययन पर आधारित एक न्यायपूर्ण प्रस्ताव है।

आइए, एक साथ मिलकर सोचें, समझें और एक ऐसा भारत गढ़ें –

  • जहाँ आरक्षण अधिकार बने, विशेषाधिकार नहीं;
  • जहाँ गरीबी प्राथमिकता हो, जाति नहीं;
  • और जहाँ हर नागरिक को आगे बढ़ने का समान अवसर मिले।

 

डॉ. आदर्श कुमार

(लेखक, विचारक एवं राष्ट्रनिष्ठ नागरिक)