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भारतीय संविधान में अनुसूचियों का महत्व

350.00 Original price was: ₹350.00.260.00Current price is: ₹260.00.

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Book Format :

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Edition :

डॉ. गौरी सिंह परते

978-93-5857-800-3

150

A5

Paperback

Nitya Publications

First

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भारतीय संविधान में अनुसूचियों का महत्व

350.00 Original price was: ₹350.00.260.00Current price is: ₹260.00.

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Description

प्रस्तावना

 

भारतीय संविधान विश्व के संविधानों में से एक अनोखा संविधान है। भारतीय संविधान की अनुसूचियां महत्वपूर्ण तथ्य हैं जो द्वितीय विश्वयुद्ध की समाप्ति के बाद जुलाई 1945 में ब्रिटेन ने भारत संबन्धी अपनी नई नीति की घोषणा की तथा भारत की संविधान सभा के निर्माण के लिए एक कैबिनेट मिशन भारत भेजा जिसमें 3 मंत्री थे। 15 अगस्त 1947 को भारत के आजाद हो जाने के बाद संविधान सभा की घोषणा हुई और इसने अपना कार्य 9 दिसम्बर 1947 से आरम्भ कर दिया। संविधान सभा के सदस्य भारत के राज्यों की सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के द्वारा चुने गए थे। पं. जवाहरलाल नेहरू, डॉ भीमराव अम्बेडकर, डॉ राजेन्द्र प्रसाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद आदि इस सभा के प्रमुख सदस्य थे। इस संविधान सभा ने 2 वर्ष, 11 माह, 18 दिन मे कुल 114 दिन बैठक की। इसकी बैठकों में प्रेस और जनता को भाग लेने की स्वतन्त्रता थी। भारत के संविधान के निर्माण में डॉ भीमराव अम्बेडकर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, इसलिए उन्हें ‘‘संविधान का निर्माता’’ कहा जाता है। भारतीय संविधान विश्व का सबसे बड़ा संविधान होने के साथ-साथ विश्व के सबसे बड़ान्यायिक संविधानों में से एक है। यह भारत की संघात्मक संरचना की रीड है। प्रत्येक संघात्मक देश में शक्ति और कार्य क्षेत्र को लेकर राज्य सरकार और संघ की सरकार के मध्य विवाद उत्पन्न होने की संभावना रहती है और इन विवाद की संभावनाओ से बचने के लिए भारतीय संविधान निर्माताओं ने राज्य सरकार और संघ की सरकार के कार्य क्षेत्र और उनके अधिकारो की सूची बनाई है जिसे अनुसूची कहा जाता है।

अनुसूचियाँ भारतीय संविधान का एक हिस्सा हैं जिसमें ऐसे विवरण होते हैं जिनका उल्लेख अनुच्छेदों में नहीं किया गया है। शुरुआत में हमारे संविधान में आठ अनुसूचियाँ थीं। बाद में संशोधन करके चार और अनुसूचियाँ जोड़ी गईं। आज हम भारतीय संविधान में शामिल प्रमुख 12 अनुसूचियों (भारतीय संविधान की सभी अनुसूचियां) के बारे में पूरी जानकारी आपको देने वाले हैं। अनुसूचियां बहुत ही महत्वपूर्ण है और आपकी परीक्षा में यहां से प्रश्न बनता है, भारतीय संविधान का निर्माण 26 नवंबर 1949 को हुआ था उस समय भारतीय संविधान में 8 अनुसूचियां थी, उसके बाद अलग-अलग संविधान संशोधन के द्वारा इसमें 4 अनुसूचियां और जोड़ी बनाई जानी चाहिए और अभी वर्तमान में भारतीय संविधान में 12 अनुसूचियां (भारतीय संविधान में कुल अनुसूचियां) हैं, डॉ0 बी. आर. अंबेडकर को भारतीय संविधान के प्रारूपण में उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका के लिए संविधान के जनक (पिता/दादा) के रूप में जाना जाता है। प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में उनके योगदान ने सभी नागरिकों, विशेषकर हाशिए पर खड़े समूहों के लिए समानता, न्याय और अधिकारों को बढ़ावा देने वाली रूपरेखा सुनिश्चित की। भारतीय संविधान में वर्णित अनुसूचियों में कोई कानूनी तत्व नहीं है, जिससे प्रावधानों को समझना आसान हो जाता है। प्रावधान कम जटिल और संक्षिप्त हो जाते हैं। भारतीय संविधान की अनुसूचियां प्रावधानों में संशोधन या अद्यतन करना आसान बनाती हैं क्योंकि संशोधन विभाजित होते हैं। अद्यतनों के मामले में पूरे अनुच्छेद को संशोधित करने की आवश्यकता नहीं होती है, जिससे बहुत समय की बचत होती है।

अनुसूची न केवल भारतीय संविधान के लिए बल्कि विभिन्न कानूनों के लिए भी सहायक के रूप में कार्य करती है। अनुसूचियों की सहायता से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की परिभाषित सूचियाँ बनाई जाती हैं। अनुसूचियाँ राज्य और संघ के लिए कानूनों की सूचियों का भी ध्यान रखती हैं। अनुसूचियों का उपयोग विभिन्न प्रकार की समस्याओं को हल करने के लिए किया जा सकता है। जब किसी विषय पर स्पष्टीकरण या अधिक जानकारी की आवश्यकता हो तो उनका पालन किया जा सकता है। ये अनुसूचियाँ संविधान का हिस्सा हैं, ये संविधान में नहीं हैं। इन्हें हमारे संविधान में अलग दस्तावेज़ के रूप में रखा गया है। हमारा संविधान बहुत लंबा है और अनुच्छेदों में अतिरिक्त जानकारी जोड़ने से इसे समझना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए अनुसूचियाँ अलग से जोड़ी गईं ताकि हमारे भारतीय संविधान के अनुच्छेदों में नहीं जोड़े गए प्रावधानों के बारे में अतिरिक्त जानकारी जोड़ी जा सके।अनुसूचियां पाठक के लिए भारतीय कानून की जानकारी को अधिक प्रभावी ढंग से समझना और उसका विश्लेषण करना आसान बनाती हैं। इन अनुसूचियों में उल्लिखित जानकारी कानूनी नहीं है। इसे आसानी से समझा जा सकता है। यह तकनीकी और प्रशासनिक प्रकृति की है। अधिनियम का मुख्य पाठ सही आकार और लंबाई का है। सभी अतिरिक्त जानकारी भारतीय संविधान की अनुसूचियों में जोड़ी गई है।

अनुसूचियों में संशोधन या परिवर्तन करना आसान होता है, क्योंकि उन्हें प्रभागों के साथ अलग से लिखा जाता है। इससे संशोधन की प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक हो जाती है। अनुसूचियों का उल्लेख प्रावधानों के कालानुक्रमिक क्रम में किया गया है।इन अनुसूचियों की सहायता से सभी अतिरिक्त जानकारी को मुख्य पाठ का हिस्सा बनाया जाता है। इन अनुसूचियों में लिखी गई जानकारी को किसी भी रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है, जैसे ग्राफ, फ्लोचार्ट या संख्याओं में। इससे जानकारी को सबसे प्रभावी ढंग से प्रदान करने में मदद मिलती है।

जोहार जोहार ✍

 

डॉ. गौरी सिंह परते