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DV Act और पुरुष (छली गई संवेदनाएँ, अनसुनी वेदनाएँ”)

300.00 Original price was: ₹300.00.210.00Current price is: ₹210.00.

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Book Format :

Name of Publisher :

Edition :

हिमांशु मिश्र Himanshu Mishra

978-93-5857-253-7

101

A5

Paperback

Nitya Publications

First

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DV Act और पुरुष (छली गई संवेदनाएँ, अनसुनी वेदनाएँ”)

300.00 Original price was: ₹300.00.210.00Current price is: ₹210.00.

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Description

विषय सूचि

अध्याय सं. अध्याय
1 घरेलू हिंसा का वैधानिक इतिहास – न्याय की तलाश में बिखरे संबंध
2 भारत में महिलावाद और कानून निर्माण की दिशा – एक दृष्टि, एक पक्ष
3 घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 – धारा-दर-धारा समीक्षा और उसके प्रभाव
4 संवैधानिक समीक्षा – क्या ये अधिनियम अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन करता है?
5 पुरुषों की आत्महत्याएँ – मौन आँकड़ों की चीख़
6 समाज की चुप्पी – पुरुष पीड़ा पर सामाजिक प्रतिक्रिया
7 हास्य का शिकार – जब पुरुष की पीड़ा मज़ाक बन जाती है
7A मनोवैज्ञानिक प्रभाव – एक मौन त्रासदी
8 पुरुष की भूमिका की गलत व्याख्या – हमेशा ‘अपराधी’ क्यों माना गया?
9 न्यायपालिका का द्वंद्व – जब जज भी मौन हो जाएँ
10 धारा 125 CrPC बनाम पुरुष – भरण-पोषण या आर्थिक दंड?
10A ‘पैरा-लीगल’ उत्पीड़न – पुलिस, वकील और व्यवस्था की संलिप्तता
11 पितृत्व का अपहरण – जब बच्चे केवल हथियार बनते हैं
11A महिला आयोग की भूमिका – न्याय या अति-संरक्षण?
12 मीडिया और फिल्मों में पुरुष की छवि – खलनायक या उपेक्षित नायक?
12A झूठे केस और दहेज वापसी का कड़वा व्यापार – समझौते की मंडी में बिकते आत्मसम्मान
13 पुरुष की आत्महत्या – एक अदृश्य महामारी
13A परामर्श केंद्रों और पारिवारिक अदालतों की भूमिका – समाधान या समर्पण?
14 निष्कर्ष: न्याय का पलड़ा – कब होगा संतुलन?
14A फर्जी प्रमाणपत्र और गढ़े हुए साक्ष्य – जब सबूत भी बनते हैं हथियार
15 अनुशंसाएँ: एक संतुलित कानून की दिशा में
15A फैमिनिज्म बनाम फैमिली – टकराव की त्रासदी
16 अंतिम शब्द: “पुरुष भी मनुष्य है – चीखते मौन की सुनवाई हो”