प्राक्कथन
लगभग 200 वर्षो तक भारत में ब्रिटिश उपनिवेशवाद ने भारतीय जीवन और समाज को व्यापक रूप से प्रभावित किया है। इसने न केवल भारतीय समाज की गहराई तक जाने वाली जडों को हिलाकर रख दिया अपितु राजनीतिक और सांस्कृतिक जीवन में अनेक नवीन आयाम जोडे। इस उपनिवेशवाद ने एक ऐसे राजनीतिक आन्दोलन को जन्म दिया जिसमें भारतीय जनता की आशाएं और आकांक्षाएं निहित थी। ये आन्दोलन समय-समय पर अनेक राजनीतिक संगठनों, समूहों, संस्थाओं, व्यक्तियों आदि के द्वारा चलाये गये जिसकी अन्तिम परिणति 1947 ई. में देश की स्वतंत्रता प्राप्ति थी। प्रस्तुत पुस्तक स्वाधीनता संघर्ष के विभिन्न आयामों और विचारों पर केन्द्रित है जो उत्तर प्रदेश राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों में लागू समान पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति – 2020 के अन्तर्गत बी.ए. तृतीय वर्ष, सेमेस्टर- ट पर आधारित है जिसमें भारत में राष्ट्रवाद (1857 ई0-1919 ई0) का विस्तृत वर्णन किया गया है।
नयी शिक्षा नीति- 2020 के पाठ्यक्रम के निर्माण की अवधि में जब हम सब स्नातक स्तर के इतिहास विषय के पाठ्यक्रम पर विचार-विमर्श और विश्लेषण कर रहे थे, उसी दौरान हमने यह तय कर लिया था कि आधुनिक भारत के इतिहास को एक नये दृष्टिकोण से देखना और समझना होगा और उसी के अनुरुप हमें एक पुस्तक को आकार देना होगा जिससे विद्यार्थी और आम जनमानस गाॅंधीजी और टैगोर के राष्ट्रवाद के सिद्धान्तों को समझकर सहज रुप से भारतीय स्वाधीनता संधर्ष के इतिहास को समझ सके।
हमने कोशिश की है कि भारत में राष्ट्रवाद और भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष के इतिहास का प्रस्तुतीकरण सारगर्भित और सरलीकृत हो और उन नये चैप्टर्स को भी शामिल किया जाय जो अब तक स्नातक स्तरीय पुस्तकों में उपलब्ध नही थे। निश्चित रुप से हम यह दावा नही कर रहे है कि प्रस्तुत पुस्तक में हमने सभी पक्षों को समेकित किया है लेकिन इतना अवश्य कहेंगे कि इस पुस्तक को हमने एक नये दृष्टिकोण से लिखने का प्रयास किया है जिससे कि स्नातक व स्नातकोत्तर स्तर के विद्यार्थी भी लाभान्वित हो और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को भी इसका लाभ मिल सके। इस पुस्तक में दी गई जानकारी का अध्ययन करके विद्यार्थी और आम जनमानस यह समझ सकेंगे कि कितनी बडी कीमत चुकाकर भारतवासियों ने राष्ट्रवाद का बिगूल फूॅंका। मेरा यह विनम्र निवेदन है कि भारत में राष्ट्रवाद को सिर्फ पढ़ने, लिखने या प्रश्नपत्रों के उत्तर तक ही सीमित न रहने दे। जाति, धर्म, मत-मतान्तर, क्षेत्रीयता से परे होकर भारत के प्रति अपने कर्तव्य का चिन्तन करें और सभी पहलुओं को उन्नत कर दुनिया को फिर से एक बार बता दे कि- ‘‘भारत आज भी विश्व गुरू है।‘‘
प्रस्तुत पुस्तक हमारे परम आदरणीय गुरू प्रो. ए.के. मित्तल को समर्पित है। इस पुस्तक के लेखन में हम विशेष रुप से अपने गुरूजन प्रोफेसर हिमांशु चतुर्वेदी व प्रोफेसर निधि चतुर्वेदी के प्रति हृदय से आभार प्रकट करते है जिनकी प्रेरणा और आशीर्वाद से हमने इस लेखन कार्य को पूरा करने का निश्चय किया। हम अपनी पत्नी डा. (श्रीमती) तोषी, सहायक प्रोफेसर- संस्कृत, राम जयपाल कालेज, छपरा और महाविद्यालय के अपने अन्य सहपाठियों के प्रति भी आभार प्रकट करते है जिनके सहयोग के बिना यह कार्य पूरा नहीं हो सकता था।
हम नित्या पब्लिकेशन, भोपाल के डा. जयकरन सिंह जी तथा उनके सहयोगियों के भी आभारी है, जिन्होने पुस्तक के प्रकाशन में विशेष रुचि ली और एक बेहतर ग्राफिक्स को डिजायन किया। आशा है कि यह पुस्तक विद्यार्थियों के साथ-साथ आम जनमानस के लिए भी उपयोगी साबित होगी। इस पुस्तक को और अधिक ज्ञानवर्द्धक तथा रूचिकर बनाने के लिए हम आपकी समस्त प्रतिक्रियाओं व सुझावों का स्वागत करेंगे।
डा. राजेश कुमार शर्मा
प्रोफेसर- इतिहास विभाग
राजकीय महाविद्यालय, रुधौली, बस्ती।
DOI : https://doi.org/10.65651/NP.9789358575941 .2025.1-221
विषय सूची
01 भारत का प्रथम स्वाधीनता संघर्ष: कारण, प्रभाव और प्रकृति
First war of Independence: Causes, Impact & Nature
02 भारत में राष्ट्रवाद के उत्थान के लिए उत्तरदायी परिस्थितियाॅं
Factors leading to the growth of Nationalism in India.
03 राष्ट्रवाद के सिद्धान्त: गाॅंधीजी और टैगोर के विचार
Theories of Nationalism : Views of Gandhi and Tagore.
04 उदारवादी चरण: उदारवादियों की विचारधारा, कार्यक्रम और नीतियाॅं
Early Phase : The Ideology, Programme and policies of Moderates.
05 उग्र राष्ट्रवाद (1906-1918) का उदय और विकास
Rise and Development of Radical Nationalism
06 स्वदेशी आन्दोलन और सूरत में कांग्रेस की फूट
Swadeshi Movement and Congress split at Surat.
07 मुस्लिम लीग का उदय: माॅंगें और कार्यक्रम
Rise of Muslim League : Demands and Programme.
08 प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान राष्ट्रीय जागृति: लखनऊॅ समझौता और होमरूल आन्दोलन
National awakening during First World War : Lucknow Pact and Homerule Movement.
Nitya Publications, Bhopal MP, India is a fast growing publisher and serving at national and international level. We are publishing all type of books like educational books, seminar / conference proceeding, reports, thesis, story books, novels, poetry books and biographies etc with ISBN.
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