मेरी यह पुस्तक प्रेरणापुंज उन असंख्य स्वयंसेवकों के जीवन का प्रकाशस्तंभ है, जिन्होंने राष्ट्रकार्य के लिए अपने सुख, परिवार, सुविधा और यहां तक कि अपने प्राणों तक का त्याग किया। यह केवल एक पुस्तक नहीं एक यज्ञ है, उन अनाम सेवकों की स्मृति में, जिनकी तपस्या ने समाज को संगठित किया, राष्ट्र को सशक्त किया और आने वाली पीढ़ियों को कर्तव्यनिष्ठा का सन्देश दिया।
अजमेर की यह पावनभूमि भारतवर्ष के सांस्कृतिक और संगठनात्मक इतिहास में एक विशिष्ट स्थान रखती है। यहां के स्वयंसेवक भी केवल कर्मयोगी नहीं थे बल्कि वह संघ कार्य के मौनस्तंभ थे। उन्होंने प्रचार नहीं किया, पर उनके जीवन स्वयं प्रचार का माध्यम बने। उन्होंने भाषण नहीं दिए, परंतु उनके आचरण ने ही प्रेरणा दी।
उनका जीवन एक जीवंत संदेश था-सेवा ही साधना है।
यह पुस्तक अजमेर के उन स्वयंसेवकों के जीवन की झलकियां प्रस्तुत करती है जिन्होंने साधारण परिस्थितियों में रहते हुए असाधारण कार्य किए। कोई शिक्षक था, कोई व्यापारी, कोई किसान या कर्मचारी। लेकिन सभी में एक समान भाव था-राष्ट्र पहले, मैं बाद में।
उनके जीवन की छोटी-छोटी घटनाएं आज भी हृदय को स्पंदित करती हैं। वह घटनाएं न केवल स्मरणीय हैं, बल्कि शिक्षाप्रद भी हैं। इन प्रसंगों को संकलित करते हुए बार-बार यह अनुभूति हुई कि संघ का कार्य केवल संगठन का ढांचा नहीं है वरन यह एक जीवंत संस्कृति है, एक जीवन पद्धति है। यह व्यक्ति के भीतर की सुषुप्त चेतना को जगाकर उसे समाज के प्रति समर्पित करता है।
संघ कार्य हमें सिखाता है कि व्यक्ति निर्माण ही राष्ट्र निर्माण का आधार है। इस पुस्तक का उद्देश्य केवल अतीत को स्मरण करना नहीं, बल्कि उन आदर्शों को वर्तमान और भविष्य में प्राणवान बनाना है। आज जब समाज में मूल्य संकट, दिशा भ्रम और स्वार्थ की प्रवृत्ति बढ़ रही है, ऐसे समय में इन स्वयंसेवकों के जीवन स्मरण हमें यह याद दिलाते हैं कि राष्ट्र के लिए जीना ही सबसे बड़ा सौभाग्य है।
मैंने प्रेरणापुंज को लिखते समय अनुभव किया कि हर स्वयंसेवक की गाथा किसी महाकाव्य के पात्र जैसी है जहां नायकत्व बाहरी नहीं, अंतर्मन की दृढ़ता और सेवाभावना से प्रकट होता है। उनके जीवनों में कोई विलास नहीं, कोई लोभ नहीं, केवल समर्पण, अनुशासन और देशप्रेम का उजाला है।
पुस्तक में शामिल गाथाओं का संकलन करने में सह-लेखक, वरिष्ठ पत्रकार-ब्लॉगर श्री एसपी. मित्तल जी का योगदान अविस्मरणीय रहा है। मैंने लिखते समय निरंतर उनसे मार्गदर्शन लिया और उन्होंने सहर्ष मुझे जानकारियां दीं। इसके लिए हृदय से सह लेखक श्री एसपी. मित्तल साहब का आभार व्यक्त करता हूं। साथ ही मेरे छोटे भाई और स्वयंसेवक दिनेश अग्रवाल जी का भी सहयोग के लिए आभारी हूं। अजमेर के जाने-अन्जाने सभी स्वयंसेवकों-कार्यकर्ताओं का भी धन्यवाद करता हूं जिन्होंने इस पुस्तक के निर्माण में सहयोग किया।
प्रेरणापुंज पुस्तक का उद्देश्य उन प्रेरक स्वयंसेवकों, और राष्ट्रसेवकों के कार्यों को उजागर करना है, जिन्होंने समाज में अपने निस्वार्थ सेवाभाव से अमिट छाप छोड़ी है। यह पुस्तक उनके जीवन से मिलने वाले संदेशों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का एक छोटा सा प्रयास है।
इस पुस्तक में अजमेर के कुछ चुनिंदा स्वयंसेवकों की ही जानकारी सम्मिलित की गई है, वही जो मुझे उपलब्ध हो सकी। जिन महानुभावों के विषय में जानकारी या फोटो प्राप्त नहीं हो सकी, उनसे और परिजनों से मैं विनम्रतापूर्वक क्षमा प्रार्थी हूं। उनका योगदान भी समाज के इतिहास में अमर रहेगा, भले ही उनका उल्लेख इस पुस्तक में न हो सका हो।
मेरा विश्वास है कि यह संकलन पाठकों को समाजसेवा और राष्ट्रनिर्माण के कार्यों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा। यह पुस्तक उन सबके प्रति श्रद्धांजलि है, जिन्होंने अपना आज समाज के आनेवाले कल के लिए अर्पित किया। जीवित स्वयंसेवकों के चरणों में मेरा नमन है और ईश्वर के धाम में बिराजित स्वयंसेवकों को मेरी श्रद्धांजलि। यह उनके प्रति हमारी कृतज्ञता और स्मरण का संकल्प है। मेरी अभिलाषा यही है कि यह कृति हर पाठक के हृदय में सेवा और संगठन की भावना को और प्रज्वलित करे। यदि इस प्रयास से किसी एक भी व्यक्ति में समर्पण की चिंगारी जागे, तो समझिए “प्रेरणापुंज” का उद्देश्य सार्थक हुआ।
– विनोद चौहान
(लेखक, ‘प्रेरणापुंज’)
Nitya Publications, Bhopal MP, India is a fast growing publisher and serving at national and international level. We are publishing all type of books like educational books, seminar / conference proceeding, reports, thesis, story books, novels, poetry books and biographies etc with ISBN.
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