मेरा नजरिया ( Mera Najariya )

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Writer – कमलाकर  वासनिक

Edition : 1

Pager Size : A5

No. of Pages : 71

ISBN : 978-93-91669-64-5

Format : Paperback & eBook

99 in stock

Description

हमारे  मन मे  हर दिन हर पल नजाने किताने सारे विचारो की समुद्र  की तरह लहरे उठती है .और समाप्त हो जाती है . समुद्र मे उठती लहरे अपने साथ न जाने कितने किमती और अमुल्य वस्तुये बाहर लाकर किनारे पर पटकती है .उसमे से मानव के लिये किमती तोकुछ कचरा भी होती है  . मनुष्य  को जो चाहिये वह अपने पास रखता है और कचरा होतो उसे फेक देता है . उसी प्रकार मेरे मन सागर मे न जाने कब से और नजाने कितनी विचारो कि लहरे उठती रही और किनारे पर आकर समाप्त होती रही .मैंने कभी उन लहरो मे से  जो कुछ भी किनारो पर आया उसे कभी संजोये रखने का प्रयास नही किया . अब मै इन विचारो को संग्रहित करने लगा हु . मेरे विचारो की पथधारा   मेरा नजरिया मे  ईसी का भौतिक रुपांतरन है .

मै नही मानता कि मेरे विचारो मे कुछ गुढ रहस्य या ऐतेहासिक पुट है .ईसलिये मेरे विचार किसिको प्रसन्न या अप्रसन्न करेंगे नही जानता . परंतु अभिव्यक्ति की आजादी अगर है तो अपने विचारो को अभिव्यक्त कर देना  चाहिये .हो सकता है विचार सही हो या गलत हो परंतु जब तक हमारे विचार सबके सामने नही आयेंगे तबतक उसकी  अच्छाईया बुराईयो का पता कैसे  चलेगा . ईसी कारन मैने अपने विचारो को दो भागो मे  एक गद्ध मे जिसमे है मेरा नजरिया दुसरा  भाग पद्ध मे है जो  मेरी तुकबंदिया  मे व्यक्त करने का प्रयास किया है .

यदि यह भाग पसंद करने योग्य साबित  हुआ तो मुझे प्रसन्नता होगी और प्रोत्साहन भी मिलेगा , उसके बाद सम्भव है  ईसी तरह मै भविष्य  मे भी प्रयास करुंगा . कुछ कमिया रह जाती है तो उसे भी दुर करने का प्रयास रहेगा . प्रयास तो यह   भी होगा की ईससे भी अच्छा कुछ लिखु  जो एक मिल का पत्थर साबित हो सके . मै यहा बता दु कि न तो मै लेखक हु और नही कोई शायर या कवि  केवल भावना को एक पथ पर चलने और उसे  एक धारा मे बहाने का प्रयास मात्र किया है .

Additional information

Weight 1 kg
Dimensions 5.5 × 8 × 0.5 cm