झूट से जंग : एक संघर्ष (jhuth se jang : ek sangarsh)

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Editors : राजुराम मेघवाऱ (चौहान

 Edition : 1

Book Size : 5*8

Pages  47                                                                                                                   

ISBN : 978-93-90178-14-8

 Format : Paperback & Ebook

Category:

Description

भारतीय हम है , यह हमारे जहन मे है लेकिन कई
बाते ऐसी भी है जो हमें नीचा देखने पर मजबूर करती
है।

जैसा कि हम चाहते है कि हमारा भारत ही नहीं
बल्कि विश्व भी अच्छा बने | मेरा मानना है कि भारत
में अधिकतर लोग मानसिक गुलाम है लोगो का
दिमाग बहुत संकुचित है जो हमारे लिए बहुत घातक है
| लोग धार्मिक रूप सै पागल है ,वे धर्म मात्र की रक्षा
कै लिए कुछ भी करने को तैयार है | भारत में ऐसे
लोगों की कमी नही है जो अंधविश्वास को पालते है |
धर्म की गन्दी सोचे, पाखंडवाद,प्रपंच, सामाजिक व
दैविक मान्यताऐ व मनुवाद एक ऐसा जहर है जो
आरत ही नही पूरी मानवता के लिए अभिशाप है|

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